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एन्ड्रयू कारनेगी (1835-1919 )
प्रख्यात अमेरिकी उधोगपति तथा स्टील किंग एन्ड्रयू कारनेगी अपने युग के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे । बहरहाल, स्कॉटलैंड में जन्मे कारनेगी को स्कूली शिक्षा शिक्षा नसीब नहीं हुई थी । 13 वर्ष उम्र में वे सफल होने का सपना लेकर अमेरिका आये । सबसे पहले उन्होंने पेनसिल्वेनिया में सूती मील में मज़दूरी की । उन्हें हर सप्ताह 1.२० डॉलर मिलते थे । बहरहाल, कारनेगी के मन में सफलता का सपना था, इसलिये उन्होंने नई चींज़े सिखने तथा। नये अवसर तलाशने का निरंतर प्रयास किया । टेलीग्राफी सीखने की वजह से उन्हें पेनसिल्वेनिया रेलरोड में प्राइवेट सेक्रेटरी तथा टेलीग्राफर की नौकरी मिल गई। उनकी लगन, सीखने की आदत तथा मेहनत की बदौलत उन्हें प्रमोशन मिलते चले गयें और वे पीट्सबर्ग क्षेत्र के सुपरिंटेंडेंट बन गये ।
उनके मन में अपना खुद का बिजनेस करने का सपना था, इसलिये वे पैसे बचाकर निवेश करते रहे । पुलमैन पैलेस कार कंपनी तथा तेल के क्षेत्र में उन्हेंने जो निवेश किया, उससे वे इतने अमीर हो गये कि उन्हेंने नौकरी छोड़कर खुद की स्टील स्टील कपंनी शुरु की । नई मशीनों तथा नई तकनीकों की बदौलत कारनेगी ने इतनी तरक्की कर ली कि वे एक के बाद एक कपंनी खोलते गये| 1901 में उन्हेंने अपनी कपंनी 25 करोड़ डॉलर में बेच दी और रिटायर हो गये।
अपने जीवनकाल में एन्ड्रयू कारनेगी ने 35 करोड़ डॉलर से अधिक की संपति शिक्षा, संस्कृत तथा शांति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को दान में दे दी । कारनेगी शून्य से शिखर तक इसलिये पहुँचे, क्योंकि वे लगातार सीखते रहे और भविष्य के लिये खुद को तैयार करते है।
" एकाग्रता मेरा सूत्रवाक्य है-
पहले ईमानदारी, फिर मेहनत,
फिर एकाग्रता। "
-एन्ड्रयू कारनेगी.
Shubhamshashi3@gmail.com
अपने जीवनकाल में एन्ड्रयू कारनेगी ने 35 करोड़ डॉलर से अधिक की संपति शिक्षा, संस्कृत तथा शांति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को दान में दे दी । कारनेगी शून्य से शिखर तक इसलिये पहुँचे, क्योंकि वे लगातार सीखते रहे और भविष्य के लिये खुद को तैयार करते है।
" एकाग्रता मेरा सूत्रवाक्य है-
पहले ईमानदारी, फिर मेहनत,
फिर एकाग्रता। "
-एन्ड्रयू कारनेगी.
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