हेनरी फोर्ड (1863-1947)
कारों को लोकप्रिय बनाने
वाले प्रख्यात अमेरिकी उधोगपति हेनरी फोर्ड का बिजनेस कैरियर शून्य से शिखर तक
पहुँचने का प्रेरक उदाहरण है | चालीस वर्ष कि उम्र तक उनके कई बिजनेस चौपट हो चुके
थे और वे लगभग दिवालिया थे | किसान परिवार में जन्में हेनरी फोर्ड बचपन से ही
मशीनों में रूचि लेते थे | अपने पिता के सो जाने बाद वे घड़ियों से खेला करते थे |
सोलह साल कि उम्र में घर छोड़ने के बाद वे दिन में स्टीम इंजन सुधारने का काम करते
थे और रात को घड़ी सुधारने का | हर दिन वे लगभग तेरह-चौदह घंटे काम करते थे |
फोर्ड ने एक ऐसी कर बनाने
का सपन देखा, जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग हो |वे इतनी सस्ती कार बनाना
चाहते थे कि आम आदमी उसे खरीद सके | इस सपने को सच करने में वे लगन से जुटे और अंत
में उन्हें सफलता मिली |
“अगर आपको विश्वास है कि आप कर सकते है
या अगर आपको विश्वास है
कि आप नहीं कर
सकते,
तो दोनों ही स्थियों में आप सही है |”
- - हेनरी फोर्ड .
एक बार फोर्ड एक ऐसा इंजन
बनाना चाहते थे, जिसके आठों सिलेंडर एक ही ब्लॉक में हों | उन्होंने अपने इंजीनियरों
से ऐसा करने को कहा | मन ही मन में हँसते हुए इंजीनियरों ने कहा यह असंभव है,
परन्तु फोर्ड ने कहा कि इस काम को करना ही है | मन मसोसकर इंजीनियरों ने एक साल तक
मेहनत की, लेकिन सफल नहीं हुए | इंजीनियरों को लगा कि अब फोर्ड अपनी जिद छोड़
देंगे, परन्तु फोर्ड अपनी जिद पर अड़े रहे | उन्होंने इंजीनियरों से कहा कि वे इस
काम में तब तक जुटे रहें, जब तक कि वे सफल ना हो जायें |लगातार मेहनत करने बाद
आखिरकार एक दिन इंजीनियरों वी-8 मोटर इंजन बनाने में सफल हो ही गये | असंभव शब्द फोर्ड के
शब्दकोश में नहीं था, इसी वजह से उन्हें यह इंजन बनाने में सफलता मिली |









कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें