किंग सी. जिलेट (1855-1932)
आज जिलेट कंपनी का कारोबार 200 से अधिक देशों में फ़ैल
चूका है और इसके पास बिलियनों डॉलर सम्पति है, परंतु एक वक्त ऐसा भी था, जब इसके
संस्थापक किंग सी. जिलेट 49 वर्ष की उम्र में लगभग दिवालिया हो चुके थे और पूँजी की
तलाश में दर-दर भटक रहे थे |
जिलेट ने अपना कैरियर एक
हार्डवेअर कंपनी में क्लर्क के रूप में शुरू किया | 21 साल की उम्र वे सेल्समैन
बने और अगले 28 सालों तक सेल्समेन के रूप में ही सडकों पर घूमते रहे | जिलेट को एक बार किसी
ने यह सुझाव दिया कि वे कोई ऐसी चीज बनायें, जिसे लोग एक बार उल्प्योग करके फेंक
दे, ताकि वह अधिक मात्रा में बिक सके | यह विचार जिलेट के मन में बेठ गया वे
डिक्शनरी पलटते रहे, ताकि किसी शब्द से उनके मन में कोई नया विचार आ जाये |एक दिन
जब 1895 में जिलेट अपने भोंथरे उस्तरे से दाढ़ी बना रहे थे, तो उनके मन में ब्लेड
बनाने का विचार कौंधा |
“जीवन हमें जो ताश के पत्ते देता है,
उन्हें हर खिलारी को
स्वीकार करना पड़ता है |
लेकिन जब पत्ते हाथ में आ जायें,
तो खिलाड़ी को यह तय करना होता है कि वह उन पत्तों से किस
तरह से खेले, ताकि वह
बाजी जीत सके |”
-वाल्टेयर.
विचार बहुत दमदार था, मगर
उनके पास न तो ब्लेड बनाने का मशीन थी, न ही पूँजी | जब मशीन बनी, तो उसकी लगत
इतनी अधिक थी कि तरह कर्ज में डूब गये | 1902 में बोस्टन के करोड़पति जॉन जॉयस ने उनके शेयर
सस्ते दामों पर खरीदकर उन्हें पूँजी दी |
जनता ने शुरुआत में ब्लेड
में अधिक रूचि नहीं दिखाई | एक साल में सिर्फ 51 रेजर ही बिके और वे भी डाक से, परन्तु कुछ समय
बाद अमेरिकी पेटेन्ट ऑफिस ने जिलेट को रेजर के अधिकार दे दीये | जिलेट ने रेजर और
ब्लेड तत्काल दुकानों पर रखवा दीये | इसके बाद उनकी ब्लेड ऐसी चली कि उसने दुनिया
का हुलिया ही ही बदल डाला |





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