गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

फ्रैंक वूलवर्थ गरीबी से लेकर अमीर बनने तक का सफर ..............

                                           फ्रैंक वूलवर्थ  (1852-1919)

           दुनिया के महान रिटेल व्यवसायी फ्रैक वूलवर्थ का बचपन बहुत गरीबी में बिता | उन्हें साल में छह महीने नंगे पैर रहना पड़ता था और जाड़े में पहनने के लिये उनके पास गर्म कपड़े नहीं थे | बहरहाल, इस गरीबी ने ही उन्हें अमीर बनने कि प्रेरणा दी |

     21 साल कि उम्र वे कार्थेज, न्यूयॉर्क पहुचें और एक स्टोर में बिना तनख्वाह के काम करने लगे, ताकि वे सीख सकें और अनुभव हासिल कर सकें | बाद में वे एक ड्राइ  गुड्स स्टोर में काम करने लगे | यहाँ पर पन्द्रह घंटे काम करने के बदले में उन्हें सिर्फ पचास सेट मिलते थे | कुछ समय बाद उन्हें दूसरे स्टोर में दस डॉलर प्रति सप्ताह कि नौकरी मिल गई | मालिक ने एक दिन उनसे कहा कि वे निकम्मे, नालायक और नाकारा है | वूलवर्थ सब कुछ छोड़-छाड़कर अपने खेत पर लौट आये | यहाँ वे नर्वस ब्रेकडाउन के शिकार हो गये |

    एक साल बाद अचानक उनके पुराने मालिक ने उन्हें वापस बुलाया | कुछ समय तक वहाँ काम करने के बाद उनके दिमाग में एक अनोखा विचार आया क्यों न एक ऐसा स्टोर खोला जाये, जिसमें हर सामान पांच और दस सेंट की कीमत पर मिले | 300 डॉलर उधार लेकर उन्होंने 1879 में लैकास्टर में ऐसा स्टोर खोला और 1911 तक अमेरिका  तथा अन्य देशों में उनकें 1000 से अधिक स्टोर खुल चुके थे | उनकी सफलता का प्रमाण थी  1913 में बनी वूलवर्थ बिल्डिंग, जो उस समय दुनिया का सबसे ऊँची ईमारत थी | कभी निराशा के शिकार रहे फ्रैंक वूलवर्थ के पास मृतु के समय 6.5 कड़ोर डॉलर की व्यक्तिगत सम्पति थी | वूलवर्थ एक क्रांतिकारी विचार की वजह से ही सफल हुए, जिस पर अमल करके उन्होंने अपने असफल जीवन को बेहद सफल बना लिया |. 

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