जॉन डी॰ रॉ॰कफेलर (1839-1937)
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स्टैंडर्ड ऑइल कंपनी के संस्थापक के और प्रख्यात अमेरिकी उधोगपति जॉन डी॰ रॉ॰कफेलर बहुत कम शिक्षित थे | सोलह वर्ष की उम्र में वे बुककीपर का काम करने लगे | उनके मन में बिजनेस करने का सपना था, इसलिये उन्होंने 23 वर्ष की उम्र में ऑइल बिजनेस के क्षेत्र में कदम रखा | अपनी बुद्धि से प्रतियोगयों को परास्त करते हुए रॉ॰कफेलर अमेरिका की 90 प्रतिशत ऑइल रिफाइनरीज के मालिक बन गये |
अमीर बनने के लिये रॉ॰कफेलर दिन-रात काम में जुटे रहे थे | अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति ,जुझारू ,प्रवृति , लगन तथा प्रतियोगी स्वाभाव की वजह के वे अमेरिका के ऑईल किंग बनने में सफल हो पाये| वे चौबीसों घंटे काम के बारे में ही सोचते रहते थे | मौज-मस्ती या मनोरंजन में वे जरा भी वक्त बर्बाद नहीं करते थे | वे कभी थियेटर नहीं जाते थे , ताश नहीं खलते थे ,पार्टी में नहीं जाते थे | उनके लिये काम ही सब कुछ था | एकनिष्ठता से अपने लक्ष्य का पीछा करने की वजह से ही वे बिलियनेअर बनने में सफल हुए |
'एकसूत्रीय लक्ष्य जीवन में
सफलता का प्रमुख तत्व है,
चाहे लक्ष्य कुछ भी हो |"
-जॉन डी॰ रॉ॰कफेलर
बहरहाल, चिंता, तनाव की जीवनशैली का उनके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ा ! वे बीमार पड़ गये | डॉक्टर ने उनसे स्पष्ट कह दिया की या वे रिटायर हो जायें या फिर मरने की तैयारी कर लें | मौत के इतने करीब आने के बाद रॉकफेलर को यह समझ में आया की पैसा महत्वपूर्ण तो है , परंतु वह साधन है , साध्य नहीं | उन्होंने चिकित्सा तथा शिक्षा के विकास के लिये लगभग 55 करोड़ डॉलर दान में दिये और रॉकफेलर फाउन्डेशन की स्थापना की , जो उनके मरने के बाद भी दुनिया भर में बीमारी और अज्ञान से लड़ रहा |
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