धीरूभाई अंबानी(1932-2002)
रिलायंस कंपनी के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की सफलता का अंदाज इसी बात के लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1959 में अपना बिजनेस मात्र 15,000 रूपये कि पूँजी से शुरू किया था और 2002 में उनकी मृतु के समय रिलायंस ग्रुप कि सकल सम्पति 60,000 करोड़ थी |
धीरूभाई गुजरात के एक गाँव में एक गरीब स्कूल शिक्षक के घर में पैदा हुए | पैसा कि तंगी के चलते दसवीं तक ही पढ़ पाये | 17 साल की उम्र में नौकरी करने अदन गये | नौ साल बाद भारत लौटकर उन्होंने अपनी पहली कंपनी रिलायंस कॉमर्शियल स्थापित की | और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा | अपनी मेहनत , लगन और बुध्दि से उन्होंने रिलायंस को देश की सबसे बड़ी कंपनी बना दिया |
एक बार उनकी मिल में एक आयातित स्पेयर पार्ट खराब हो जाने के कारण काम रुक गया | आम तौर पर इस स्पेयर पार्ट को बुलवाने में एक महीना लग जाता, परन्तु धीरूभाई ने खाश तौर पर एक आदमी को हवाई जहाज से विदेश भेजा और दो दिन में स्पेयर पार्ट बुलवाकर मिल चालू करवा दिया |
‘बड़ी बातें सोचो तेज सोचो,
दूसरों से पहले सोचो |
विचारों पर किसी का
एकाधिकार नहीं है |”
-धीरूभाई अंबानी
धीरूभाई ने अपने दम पर भारतीय शेयर बाजार का नक्शा बदल दिया |1977 में रिलायन्स ने अपने शेयर जारी किया | उनके पहले किसी बिजनेसमैन ने आम लोगों से इतने बड़े पैमाने पर पैसा जुटाने का जोखिम नहीं लिया था | 1982 में उन्होंने सटोरियों को ऐसा सबक सिखाया कि बाद में वे रिलायंस के शेयरों के साथ छेड़खानी करना भूल गये |
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जब वे शेल कंपनी के पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल भरने का काम करते थे, तब उन्होंने यह सपना देखा था कि वे भी शेल जैसी कंपनी बनायेंगे | और उन्होंने अपने सपने को सच कर दिखाया | धीरूभाई की जीवनी इसी बात की गवाह है कि बड़ी सफलता उन्हीं को मिलती है, जो बड़े सपना देखते हैं|



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