शनिवार, 19 दिसंबर 2015

हेनरी फोर्ड का बिजनेस कैरियर शून्य से शिखर तक पहुँचने का प्रेरक उदाहरण है....

हेनरी फोर्ड (1863-1947)



            कारों को लोकप्रिय बनाने वाले प्रख्यात अमेरिकी उधोगपति हेनरी फोर्ड का बिजनेस कैरियर शून्य से शिखर तक पहुँचने का प्रेरक उदाहरण है | चालीस वर्ष कि उम्र तक उनके कई बिजनेस चौपट हो चुके थे और वे लगभग दिवालिया थे | किसान परिवार में जन्में हेनरी फोर्ड बचपन से ही मशीनों में रूचि लेते थे | अपने पिता के सो जाने बाद वे घड़ियों से खेला करते थे | सोलह साल कि उम्र में घर छोड़ने के बाद वे दिन में स्टीम इंजन सुधारने का काम करते थे और रात को घड़ी सुधारने का | हर दिन वे लगभग तेरह-चौदह घंटे काम करते थे |



      फोर्ड ने एक ऐसी कर बनाने का सपन देखा, जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और उपयोग हो |वे इतनी सस्ती कार बनाना चाहते थे कि आम आदमी उसे खरीद सके | इस सपने को सच करने में वे लगन से जुटे और अंत में उन्हें सफलता मिली |

    अगर आपको विश्वास है कि आप कर सकते है
   या अगर आपको विश्वास है 
                    कि आप नहीं कर सकते,
                    तो दोनों ही स्थियों में आप सही है |
-         - हेनरी फोर्ड .



      एक बार फोर्ड एक ऐसा इंजन बनाना चाहते थे, जिसके आठों सिलेंडर एक ही ब्लॉक में हों | उन्होंने अपने इंजीनियरों से ऐसा करने को कहा | मन ही मन में हँसते हुए इंजीनियरों ने कहा यह असंभव है, परन्तु फोर्ड ने कहा कि इस काम को करना ही है | मन मसोसकर इंजीनियरों ने एक साल तक मेहनत की, लेकिन सफल नहीं हुए | इंजीनियरों को लगा कि अब फोर्ड अपनी जिद छोड़ देंगे, परन्तु फोर्ड अपनी जिद पर अड़े रहे | उन्होंने इंजीनियरों से कहा कि वे इस काम में तब तक जुटे रहें, जब तक कि वे सफल ना हो जायें |लगातार मेहनत करने बाद आखिरकार एक दिन इंजीनियरों वी-8 मोटर इंजन बनाने में सफल हो ही गये | असंभव शब्द फोर्ड के शब्दकोश में नहीं था, इसी वजह से उन्हें यह इंजन बनाने में सफलता मिली |

किंग सी. जिलेट का (1855-1932) तक का सफर.......

किंग सी. जिलेट (1855-1932)




           आज जिलेट कंपनी का कारोबार 200 से अधिक देशों में फ़ैल चूका है और इसके पास बिलियनों डॉलर सम्पति है, परंतु एक वक्त ऐसा भी था, जब इसके संस्थापक किंग सी. जिलेट 49 वर्ष की उम्र में लगभग दिवालिया हो चुके थे और पूँजी की तलाश में दर-दर भटक रहे थे |





      जिलेट ने अपना कैरियर एक हार्डवेअर कंपनी में क्लर्क के रूप में शुरू किया | 21 साल की उम्र वे सेल्समैन बने और अगले 28 सालों तक सेल्समेन के रूप में ही सडकों पर घूमते रहे | जिलेट को एक बार किसी ने यह सुझाव दिया कि वे कोई ऐसी चीज बनायें, जिसे लोग एक बार उल्प्योग करके फेंक दे, ताकि वह अधिक मात्रा में बिक सके | यह विचार जिलेट के मन में बेठ गया वे डिक्शनरी पलटते रहे, ताकि किसी शब्द से उनके मन में कोई नया विचार आ जाये |एक दिन जब 1895 में जिलेट अपने भोंथरे उस्तरे से दाढ़ी बना रहे थे, तो उनके मन में ब्लेड बनाने का विचार कौंधा |
           जीवन हमें जो ताश के पत्ते देता है,
      उन्हें हर खिलारी को स्वीकार करना पड़ता है |
                      लेकिन जब पत्ते हाथ में आ जायें,
                    तो खिलाड़ी को यह तय करना होता है कि        वह उन पत्तों से किस                            
       तरह से खेले, ताकि वह बाजी जीत सके |

                                -वाल्टेयर.
      विचार बहुत दमदार था, मगर उनके पास न तो ब्लेड बनाने का मशीन थी, न ही पूँजी | जब मशीन बनी, तो उसकी लगत इतनी अधिक थी कि तरह कर्ज में डूब गये | 1902 में बोस्टन के करोड़पति जॉन जॉयस ने उनके शेयर सस्ते दामों पर खरीदकर उन्हें पूँजी दी |

जनता ने शुरुआत में ब्लेड में अधिक रूचि नहीं दिखाई | एक साल में सिर्फ 51 रेजर ही बिके और वे भी डाक से, परन्तु कुछ समय बाद अमेरिकी पेटेन्ट ऑफिस ने जिलेट को रेजर के अधिकार दे दीये | जिलेट ने रेजर और ब्लेड तत्काल दुकानों पर रखवा दीये | इसके बाद उनकी ब्लेड ऐसी चली कि उसने दुनिया का हुलिया ही ही बदल डाला |

गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

फ्रैंक वूलवर्थ गरीबी से लेकर अमीर बनने तक का सफर ..............

                                           फ्रैंक वूलवर्थ  (1852-1919)

           दुनिया के महान रिटेल व्यवसायी फ्रैक वूलवर्थ का बचपन बहुत गरीबी में बिता | उन्हें साल में छह महीने नंगे पैर रहना पड़ता था और जाड़े में पहनने के लिये उनके पास गर्म कपड़े नहीं थे | बहरहाल, इस गरीबी ने ही उन्हें अमीर बनने कि प्रेरणा दी |

     21 साल कि उम्र वे कार्थेज, न्यूयॉर्क पहुचें और एक स्टोर में बिना तनख्वाह के काम करने लगे, ताकि वे सीख सकें और अनुभव हासिल कर सकें | बाद में वे एक ड्राइ  गुड्स स्टोर में काम करने लगे | यहाँ पर पन्द्रह घंटे काम करने के बदले में उन्हें सिर्फ पचास सेट मिलते थे | कुछ समय बाद उन्हें दूसरे स्टोर में दस डॉलर प्रति सप्ताह कि नौकरी मिल गई | मालिक ने एक दिन उनसे कहा कि वे निकम्मे, नालायक और नाकारा है | वूलवर्थ सब कुछ छोड़-छाड़कर अपने खेत पर लौट आये | यहाँ वे नर्वस ब्रेकडाउन के शिकार हो गये |

    एक साल बाद अचानक उनके पुराने मालिक ने उन्हें वापस बुलाया | कुछ समय तक वहाँ काम करने के बाद उनके दिमाग में एक अनोखा विचार आया क्यों न एक ऐसा स्टोर खोला जाये, जिसमें हर सामान पांच और दस सेंट की कीमत पर मिले | 300 डॉलर उधार लेकर उन्होंने 1879 में लैकास्टर में ऐसा स्टोर खोला और 1911 तक अमेरिका  तथा अन्य देशों में उनकें 1000 से अधिक स्टोर खुल चुके थे | उनकी सफलता का प्रमाण थी  1913 में बनी वूलवर्थ बिल्डिंग, जो उस समय दुनिया का सबसे ऊँची ईमारत थी | कभी निराशा के शिकार रहे फ्रैंक वूलवर्थ के पास मृतु के समय 6.5 कड़ोर डॉलर की व्यक्तिगत सम्पति थी | वूलवर्थ एक क्रांतिकारी विचार की वजह से ही सफल हुए, जिस पर अमल करके उन्होंने अपने असफल जीवन को बेहद सफल बना लिया |. 

बुधवार, 16 दिसंबर 2015

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के बाड़े में जानकारीयां..........

     डिजिटल इंडिया
                                प्रोजेक्ट के बाड़े में जाने :-





          देश ने विकास के नए चरण पर पग रखा | जब मोदी सरकार ने  डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट की घोषणा की  | डिजीटल इंडिया  नव भारत के निर्माण में एक अहम् फैसला हैं |मोदी सरकार ने देश में डिजीटल इंडिया प्रोजेक्ट को लॉन्च किया जिसके लिए जगह जगह पर डिजीटल इंडिया इवेंट्स हो रहे हैं |





प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट का विमोचन किया | उन्होंने विडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बात जनता तक पहुंचाई |

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य :
Aim Of Digital India Project :
डिजिटल इंडिया मोदी सरकार का एक अहम् प्रोजेक्ट के जिसके जरिये सभी ग्राम पंचायत को इंटरनेट ब्रोड्बैंड के जरिये जोड़ा जायेगा |जिसके तहत  प्रशासन को बढ़ावा देने की साथ ही अर्थव्यवस्था सुधारने का लक्ष्य हैं |






BSNL के उच्च अधिकारी ने बताया कि डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के अंतर्गत 335 गाँवों को हाई स्पीड इन्टरनेट के जरिये जोड़ा जायेगा |

डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट  को प्रोत्साहन देने के लिए ‘Digital Week’ मनाया जा रहा हैं जिसके अंतर्गत जनता एवम स्कूल के छात्रो को न्यू टेलिकॉम सर्विस एवम e-गवर्नेंस के बारे में जानकारी दी जाएगी |


        प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि जनता को जागरूक बनाने के लिए राजधानी दिल्ली में  ‘Digital India Event’ मनाया जा रहा हैं जिसके तहत प्रतिदिन 10 हजार लोगो को इसका महत्व समझाया जायेगा | साथ ही प्रतिदिन e-गवर्नेंस प्रोजेक्ट की ओपनिंग की जाएगी |इस (Digital India Project) दिशा में प्रॉजेक्ट वाइब्रैंट मोदी जी द्वारा उनके कार्यकाल में गुजरात में लाया गया था | अब इस तरह की सोच को पुरे देश में लाने का प्रयास किया जा रहा हैं जिसके लिए सबसे पहले गाँव से शुरुवात की जा रही हैं जो कि एक उम्दा सोच हैं क्यूंकि देश के गाँव को डिजिटल दुनिया का ज्ञान सुई जितना भी नहीं हैं और यही कमजोरी हैं उनके विकास में |





Launching Of Digital India project :
डिजीटल इंडिया प्रोजेक्ट  का विमोचन 1 जुलाई 2015 को इंदिरा गाँधी स्टेडियम में किया गया |

डिजीटल इंडिया प्रोजेक्ट के इस इवेंट में कई कंपनियों के सीईओ ने भाग लिया |जिसमे मुकेश अम्बानी (रिलाएंस), सायरस मिस्त्री (टाटा ग्रुप), अजीम प्रेमजी (विप्रो), सुनील मित्तल (भारती ग्रुपआदि सम्मलित थे | इसके अलावा यह भी सुनने में हैं बिल गेट्स भी इस डिजीटल इंडिया इवेंट में भाग ले सकते हैं |




Benefits Of Digital India project 
डिजीटल इंडिया प्रोजेक्ट के लाभ :
Digital India Project तहत सभी को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जोड़ा जायेगा |साथ ही इसके फायदे समझाते हुए इसके प्रति जागरूक बनाया जायेगा | अब तक शहरो में लोग इंटरनेट को बहुत अच्छे से समझ चुके हैं लेकिन फिर भी e-shopping, e-study,e-ticket एवम e-banking के तरफ रुझान केवल महानगरों में हैं | छोटे शहर भी इस तरह की सुविधाओं के प्रति जागरूक नहीं हैं | जबकि यह सब डिजिटलाईजेशन के लिए बहुत जरुरी हैं | अगर गाँव का सोचे तो वे अब तक कंप्यूटर एवम लैपटॉप को भी आसानी से अपना पाने में असमर्थ हैं |

अतः सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम जनता को डिजिटल दुनिया के प्रति जागरूक करेगा |


-हॉस्पिटल पोर्टल : Digital India Project अंतर्गत जनता आसानी से डॉक्टर से कंसल्ट कर पायेगी | अपोइंटमेंट भी समय पर इसी पोर्टल के जरिये दिया जायेगा | संकट के समय किसी भी रोग के रोग के बारे में सभी जानकारी आसानी से इस पोर्टल के माध्यम से दी जाएगी |


-बस्ता पोर्टल : इसके (Digital India Project) अंतर्गत छात्रों को बुक्स प्रोवाइड कराई जाएगी | जो भी पढाई संबंधी जानकारी चाहिये | वो इस -बस्ता पोर्टल के तहत छात्रों को दी जाएगी |जरुरी पढाई संबंधी नोट्स या अन्य मटेरियल भी इस पोर्टल के जरिये प्रोवाइड कराये जायेंगे | और इसका इस्तेमाल कोई भी कही से भी कर सकता हैं |
नौकरी के लिए भी सभी जानकारी इन्टरनेट पर हैं इसके लिए भी कई गवर्नमेंट द्वारा संचालित पोर्टल लांच किये जायेंगे जिसके तहत रोजगार के संबंध में सभी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी |

डिजिटल लाकर्स : सरकार द्वारा डिजिटल लॉकर्स प्रोवाइड कराये गये हैं जिसमे व्यक्ति अपने जरुरी दस्तावेज सुरक्षित रख सकता हैं | 

Digital India project के कारण सभी कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी | ऑनलाइन होने के कारण रिश्वत जैसे कार्य कम हो जायेंगे क्यूंकि सभी कार्य डिजिटल तरीके से होने के कारण सभी आँखों के सामने होंगे | अतः इससे कई हद तक भ्रष्ट्राचार रोका जा सकता हैं |

Digital India project के कारण कोई भी काम आसानी से बिना तकलीफ के घर बैठे हो जायेंगे |
Digital India project इससे देश में रोजगार बढ़ेगा |
Digital India project लोगो का विकास कई गुना तेजी से बढ़ेगा |
डिजिटलाइजेशन से लोगो के प्रति कार्ड पेमेंट या नेट बैंकिंग के प्रति नकारात्मक सोच कम होगी जिससे इनका प्रयोग बढ़ेगा और कालाबाजारी भी कम होगी | साथ ही अर्थव्यवस्था सुचारू होगी |

गाँव को इस Digital India project में अहम् रखने से नीव मजबूत होगी जो कि बहुत जरुरी हैं क्यूंकि शहरी लोग आसानी से स्मार्ट दुनियाँ को अपनाते हैं लेकिन सुविधा की कमी के कारण गाँव के लोग पीछे रह जाते हैं |
इस तरह डिजिटल इंडिया इवेंट में डेली एक नयी योजना लाई जाएगी जो जनता को इसका महत्व बताएगी | Digital India project यह एक अच्छी शुरुवात हैं जिससे देश का विकास एक्सपोनेंशियल ग्राफ की तरह होगा लेकिन इसके लिए हमें इस तरह की व्यवस्थाओं से जुड़ना होगा | उन्हें सीखना होगा |


Digital India project के तहत कई एडवांस टेक्नोलॉजी तेजी से देश में लाई जाएँगी जिसके लिए यह रिलायंसविप्रो एवम टाटा जैसी कंपनिया इन्वेस्ट करेंगी | इन सभी दिग्गजों का मानना हैं इससे देश का बहुत अधिक विकास होगा | रोजगार में तीव्रता से वृद्धी होगी साथ ही पढाई के लिए भी दूर-दूर तक भटकना नहीं होगा | सभी नामी बिज़नेसमेनचैरेमैन फाउंडर इस Digital India project के लिए बहुत उत्साहित हैं सभी ने इसकी जोर शोर से सराहना की |

भारत का नव निर्माण का सपना सच होता दिखाई दे रहा हैं क्यूंकि देश में बहुत ही कम लोग डिजीटल दुनियाँ से जुड़े हैं और यह एक बहुत बड़ी कमी हैं जिसके कारण देश के विकास की गति कम हैं |



 अब वर्ष 2015 में कई योजना देश में लागु की गई हैं भारी त्रासदी के बाद देश को स्थिर करने के लिए कई योजनाये लागु की गई हैं जिनमे अहम् हैं :-

क्रमांक    योजना का नाम
1              प्रधानमंत्री मुद्रा (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट रिफाइनेंस एजेंसी)बैंक योजना
2              राष्ट्रीय निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड
3              स्व-रोजगार और प्रतिभा उपयोगिता
4              वन बंधू कल्याण योजना
5              प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना
6              प्रवासी कौशल विकास योजना
7              परम्परागत कृषि विकास योजना
8              राष्ट्रीय स्वास्थ बीमा योजना
9              कोशन विकास योजना
10            अटल योजना
11            प्रधानमंत्री जन धन योजना
12            सुकन्या समृधि योजना
13            बेटी बचाओबेटी पढाओ
14            नयी मंजिल योजना
इस तरह की कई योजनाये देश के विकास के लिए चलाई जा रही हैं | इनके बारे में जानकारी ले कर इनका हिस्सा बने |



योजना के मुख्य उद्देश्य को समझे एवम लाभ ले |

हेनरी फोर्ड का बिजनेस कैरियर शून्य से शिखर तक पहुँचने का प्रेरक उदाहरण है....

हेनरी फोर्ड (1863-1947)             कारों को लोकप्रिय बनाने वाले प्रख्यात अमेरिकी उधोगपति हेनरी फोर्ड का बिजनेस कैरियर शून्य स...